Yuvrajpur Ghazipur 232332

जिला मुख्यालय से मात्र 8 किमी दूर गंगा नदी उस पार बसा प्यारा सा गाव युवराजपुर २३२३३२( थाना-सुहवल विकासखंड-रेवतीपूर तहसील-ज़मनिया )

Girish Kant

युवराजपुर गाजीपुर के युवक ने सिनेमाटोग्रॉफी में हासिल किया मुकाम

Shaheed Vishvabhar Singh Yuvrajpur Ghazipur

युवराजपुर प्रवेश द्वार पर युवराजपुर के वीर सपूत शहीद विश्वभर सिंह की मूर्ति

Vivek Singh (BJP Sector Pramukh)

प्रधान मंत्री उज्जावला योजना के अंतर्गत युवराजपुर मे रसोई गैस वितरण करते हुए बीजेपी सेक्टर प्रमुख विवेक सिह

Volleyball Match Ground at Yuvrajpur

गाव के प्रधान प्रतिनिधि श्री दिनेश सिंह (चुनमुन) के प्रयास से गाव मे रात मे वलीवाल मैच भी खेला जा रहा है

People of Yuvrajpur

विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर युवराजपुर के लोग

Yuvrajpur on Google Map

आप उपर गूगल मैप पर क्लिक करके अपने गाव युवराजपुर को गूगल पर देख सकते है- https://www.google.co.in/maps/@25.5792208,83.6501437,16z

Jay Javan Jay Kisan

जय जवान जय किसान (प्यारा सा हरा भरा गाव यहा पर हर प्रकार की खेती युक्त ज़मीन है )

Monday, 28 October 2019

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास।।   
                                                                             
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। यह स्थान शिव और पार्वती का आदि स्थान है इसीलिए आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। इसका उल्लेख महाभारत और उपनिषद में भी किया गया है। ईसा पूर्व 11वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने जिस विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था उसका सम्राट विक्रमादित्य ने जीर्णोद्धार करवाया था। उसे ही 1194 में मुहम्मद गौरी ने लूटने के बाद तुड़वा दिया था।
 
 
इतिहासकारों के अनुसार इस भव्य मंदिर को सन् 1194 में मुहम्मद गौरी द्वारा तोड़ा गया था। इसे फिर से बनाया गया, लेकिन एक बार फिर इसे सन् 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह द्वारा तोड़ दिया गया। पुन: सन् 1585 ई. में राजा टोडरमल की सहायता से पं. नारायण भट्ट द्वारा इस स्थान पर फिर से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। इस भव्य मंदिर को सन् 1632 में शाहजहां ने आदेश पारित कर इसे तोड़ने के लिए सेना भेज दी। सेना हिन्दुओं के प्रबल प्रतिरोध के कारण विश्वनाथ मंदिर के केंद्रीय मंदिर को तो तोड़ नहीं सकी, लेकिन काशी के 63 अन्य मंदिर तोड़ दिए गए।
 
 
डॉ. एएस भट्ट ने अपनी किताब 'दान हारावली' में इसका जिक्र किया है कि टोडरमल ने मंदिर का पुनर्निर्माण 1585 में करवाया था। 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। उस समय के लेखक साकी मुस्तइद खां द्वारा लिखित 'मासीदे आलमगिरी' में इस ध्वंस का वर्णन है। औरंगजेब के आदेश पर यहां का मंदिर तोड़कर एक ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी। औरंगजेब ने प्रतिदिन हजारों ब्राह्मणों को मुसलमान बनाने का आदेश भी पारित किया था। आज उत्तर प्रदेश के 90 प्रतिशत मुसलमानों के पूर्वज ब्राह्मण है।
 
 
सन् 1752 से लेकर सन् 1780 के बीच मराठा सरदार दत्ताजी सिंधिया व मल्हारराव होलकर ने मंदिर मुक्ति के प्रयास किए। 7 अगस्त 1770 ई. में महादजी सिंधिया ने दिल्ली के बादशाह शाह आलम से मंदिर तोड़ने की क्षतिपूर्ति वसूल करने का आदेश जारी करा लिया, परंतु तब तक काशी पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज हो गया था इसलिए मंदिर का नवीनीकरण रुक गया। 1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था।
 
 
अहिल्याबाई होलकर ने इसी परिसर में विश्वनाथ मंदिर बनवाया जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया। ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने ज्ञानवापी का मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहां विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई।
 
 
सन् 1809 में काशी के हिन्दुओं ने जबरन बनाई गई मस्जिद पर कब्जा कर लिया था, क्योंकि यह संपूर्ण क्षेत्र ज्ञानवापी मं‍डप का क्षेत्र है जिसे आजकल ज्ञानवापी मस्जिद कहा जाता है। 30 दिसंबर 1810 को बनारस के तत्कालीन जिला दंडाधिकारी मि. वाटसन ने 'वाइस प्रेसीडेंट इन काउंसिल' को एक पत्र लिखकर ज्ञानवापी परिसर हिन्दुओं को हमेशा के लिए सौंपने को कहा था, लेकिन यह कभी संभव नहीं हो पाया।
 
 
इतिहास की किताबों में 11 से 15वीं सदी के कालखंड में मंदिरों का जिक्र और उसके विध्वंस की बातें भी सामने आती हैं। मोहम्मद तुगलक (1325) के समकालीन लेखक जिनप्रभ सूरी ने किताब 'विविध कल्प तीर्थ' में लिखा है कि बाबा विश्वनाथ को देव क्षेत्र कहा जाता था। लेखक फ्यूरर ने भी लिखा है कि फिरोजशाह तुगलक के समय कुछ मंदिर मस्जिद में तब्दील हुए थे। 1460 में वाचस्पति ने अपनी पुस्तक 'तीर्थ चिंतामणि' में वर्णन किया है कि अविमुक्तेश्वर और विशेश्वर एक ही लिंग है।

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियो का अनुसंधान )

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियो का अनुसंधान )

■ क्रति = सैकन्ड का  34000 वाँ भाग
■ 1 त्रुति = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
■ 2 त्रुति = 1 लव ,
■ 1 लव = 1 क्षण
■ 30 क्षण = 1 विपल ,
■ 60 विपल = 1 पल
■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) ,
■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा )
■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) ,
■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह ,
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष ,
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग ,
■ 3 युग = 1 त्रैता युग ,
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 76 महायुग = मनवन्तर ,
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महाकाल = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )

सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यही है। जो हमारे देश भारत में बना। ये हमारा भारत जिस पर हमको गर्व है l
दो लिंग : नर और नारी ।
दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)।
दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन।

तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।
तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल।
तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु।
तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत।
तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव।
तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी।
तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान।
तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं।
तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।

चार धाम : बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।
चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।
चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
चार निति : साम, दाम, दंड, भेद।
चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री।
चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।
चार समय : सुबह, शाम, दिन, रात।
चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।
चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।
चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।
चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।
चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।
चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।
चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।
चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।
चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।

पाँच तत्व : पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।
पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।
पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।
पाँच  उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।
पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।
पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।
पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।
पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।
पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।
पाँच इन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।
पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।
पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।
पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।

छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।
छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।
छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच),  मोह, आलस्य।

सात छंद : गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।
सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
सात सुर : षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।
सात चक्र : सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।
सात वार : रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।
सात मिट्टी : गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।
सात महाद्वीप : जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।
सात ॠषि : वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।
सात ॠषि : वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।
सात धातु (शारीरिक) : रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।
सात रंग : बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
सात पाताल : अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।
सात पुरी : मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।
सात धान्य : उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।

आठ मातृका : ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।
आठ लक्ष्मी : आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।
आठ वसु : अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।
आठ सिद्धि : अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।
आठ धातु : सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।

नवदुर्गा : शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।
नवग्रह : सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
नवरत्न : हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।
नवनिधि : पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।

दस महाविद्या : काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।
दस दिशाएँ : पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।
दस दिक्पाल : इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।
दस अवतार (विष्णुजी) : मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।
दस सति : सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।

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Friday, 11 October 2019

पड़ोसी गाव पटकनिया : अपना गांव, अपना पहचान - गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश



#पटकनिया : अपना गांव, अपना पहचान


अपना गांव (पटकनियां) #गाजीपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी की दूरी पर बसा-बसाया गया है। यह #जमानिया तहसील के रेवतीपुर ब्लाक और सुहवल न्याय पंचायत का प्रमुख गांव है। अपने गांव का इतिहास करीब 250 साल पुराना है। इसके बसावट को देखकर पता लगाया जा सकता है कि यहां लोग जैसे-जैसे बाहर से आते गए वैसे ही बसते चले गए हैं। यहां भिन्न जाति के लोगों को भी एक ही टोला में पा सकते हैं। यहां अधिकांश आबादी बाहर से आकर बसी है।
जानकारों का कहना है कि अपना गांव सुहवल का एक डेरा हुआ करता था। जो आगे चलकर पटकनिया मौजा के नाम से जाना गया। अपने गांव की सीमा पूरब में रेवतीपुर गांव से कटकर बने कल्याणपुर गांव से लगती है, पश्चिम में युवराजपुर, दक्षिण में अररिया व गौरा और सुदूर उत्तर में गंगा नदी हैं।
पटकनिया कभी गाजीपुर लोकसभा और दिलदारनगर विधानसभा का प्रभावी गांव बनकर उभरा था। अपना गांव जिले और प्रदेश स्तर के नेताओं के निगाह के केंद्र में रहता था। नये परिसीमन के बाद अपने गांव की पहचान बगल के जिले बलिया - लोकसभा का एक छोर पर बसे अंतिम गांव और मुहम्मदाबाद विधानसभा का उस पार बसा अंतिम गांव के तौर पर हो गया है। जबकि हमारे पश्चिम में डेढ किमी दूर युवराजपुर आज भी गाजीपुर लोकसभा और जंगीपुर विधानसभा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बना हुआ है। वर्तमान में अपने गांव में 5000 से ज्यादा मतदाता होने के बावजूद भी सभी राजनीतिक दलों के लिए अछूत बन गया है। इसलिए यहां विकास कोसो दूर होता जा रहा है। यह हम सभी के लिए सोचनिय विषय है।
भौगोलिक तौर पर देखें तो अपना गांव गंगा के बहने के स्थान परिवर्तन और नदी द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी के भू-भाग पर बसा हुआ है। कभी यह कुश, राढ़ी, सरपत (पतलो), बबूल और मदार का घना जंगली सा इलाका था। यहां बसने वाले हमारे पूर्वज इन जंगलों को साफ किये खेत बनाएं, घर बनाए और डेरा बनाए। आज यह पूरा क्षेत्र पटकनिया खास और गंग-बरार पटकनिया जदी के नाम से कागजों में दर्ज है। जिसमें पटकनिया खास का चकबंदी हुआ है।
अपने गांव के नामकरण को लेकर कई बातें हैं। यह सुहवल गांव सभा का पटकनिया मौजा था। वहीं पटकनिया नाम के पीछे लोग अपना ठोस तर्क देते हैं कि अपना गांव शुरू से ही पहलवानों का गांव रहा है। और, जो भी अपने को बड़ा पहलवान समझता था पटकनिया में पटकनी पाकर जाता था। एक समय ऐसा बताया जाता है कि गांव के हर टोले-मुहल्ले में अखाड़ा हुआ करता था। जहां, क्या बुजुर्ग क्या नौजवान सब पाठा थे। इस गांव की एक खासियत थी कि पहलवानी के चक्कर में हर एक परिवार से एक -दो बांड़ (बिना ब्याह) रह जाया करते थे। जिनको खलीफा, मलिकार और मालिक उपनाम दिया जाता था।
पहलवानी का नाम लेते ही अपने गांव के नामी पहलवानों की लंबी फेहरिस्त आंखों के सामने आ जाती है । उनमें स्व. श्याम लाल सिंह (दादा), स्व. गिरिजा सिंह (दादा), स्व. रामाशंकर सिंह, स्व. मंगला सिंह, स्व. कुंवर सिंह, स्व. बहसु सिंह, स्व. रघुनाथ सिंह, स्व. मुनेसर यादव, स्व. जयराम चौधरी और श्री उदयभान सिंह का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
जब बात स्वतंत्रता आंदोलन का आए तो उसमें भी अपना गांव जन-धन की हानि के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। स्व. वंशनारायण मिश्र और स्व. बाबू अमर सिंह की अगुवाई में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन गांव में हुआ था। उसी दरम्यान 'भारत छोडो़ आंदोलन ' 1942 में अंग्रेजी फौज द्वारा अपने गांव के खेत, खलिहान और मकानों को जला दिया गया। महीनों अंग्रेज़ी हुकूमत ने अपने गांव के लोगों को प्रताड़ित किया था और लोगों को घर-दुआर छोड़कर गांव के सिवान और अन्य इलाकों में कई महीनों तक छिपना पड़ा था।
अंग्रेज सैनिक यहां महीनों-महीनों तक डेरा डालकर रही थी और क्रांतिकारियों को खोजती रही।
स्व. वंशनारायण मिश्र और स्व. अमर बाबू स्वतंत्र भारत में कांग्रेस के अच्छे नेताओं के रुप में जाने-पहचाने गये।
अपना गांव अंग्रेजों के समय में मालगुजारी वसूलने के लिए कई जमींदारों के अधीन रहा। इसमें प्रमुख रूप से जो नाम चर्चित हुए वे - युसूफपुर खड़बा के एक बाबू साहब जिनका परिवार गाजीपुर के रीगल टाकिज से ताल्लुक रखता था, दत्ता परिवार (बंगाली), स्व. कांता सिंह और स्व. पशुपति सिंह थे। और, अपने गांव के एक कायस्थ परिवार से राम नारायण लाल कारिंदा हुआ करते थे। उस समय इनकी खेती सैकड़ो बीघे से ज्यादा में हुआ करती थी।
गांव के बड़े खेतिहरों में स्व. खीरु सिंह का भी नाम हुआ करता था। अपने गांव में एक कहावत प्रचलित है कि - नरवन में नीरु रा , पटकनिया में खीरु रा और सीताब दीयर में गरिबा रा। ये सब लोग अपने क्षेत्र के बड़े कास्तकारों में थे।
अंग्रेज़ी शासन में भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने गांव के लोगों द्वारा भगीरथ प्रयास किया गया। स्व. जगनारायण राय और स्व. जगरनाथ सिंह मास्टर साहब जैसे लोगों ने गांव के लोगों को शिक्षित करने का अलक जगाया था।
समयोपरांत अपने गांव के श्री सुभाष तिवारी और श्री अभी नारायण सिंह कई लोगों के प्रयास से विद्यालय स्थापित किये गये। वर्तमान में श्री धनराज राय, श्री अच्छे यादव, श्री सुनिल यादव द्वारा विद्यालय संचालित किया जा रहा है। जब शिक्षा की बात होती है तो गांव के सगीना राम (वकील) का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। जो पढाई के साथ -साथ गांव के खिलाड़ियों को जरसी और खेल का सामान मुहैया कराते थे।
अपने गांव में दो सरकारी प्राथमिक पाठशाला और एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय भी संचालित हो रहा है। साथ ही अपने गांव से करीब ढाई सौ बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए जा रहे हैं। जबकि उच्च शिक्षा और बालिका शिक्षा के लिए अपना गांव अभी भी तरस रहा है।
खेल-कूद कभी अपने गांव की एक पहचान हुआ करती थी। जब पटकनिया की टीम फुटबॉल मैदान में उतरती थी लोगों की निगाहें उन पर ठहर सी जाती थी। फुटबॉल में अपना गांव जिला चैंपियन की श्रेणी में स्थान रखता था ।
बता दें कि कर्नल संभू सिंह, स्व. मेजर बृजराज तिवारी , कर्नल लल्लन तिवारी, कैप्टन सुरेंद्र बहादुर राय और कर्नल मोतिलाल राय अपने गांव की मिट्टी में पैदा हुए।
वहीं यहां के खिलाड़ियों में श्री चेतनारायण सिंह, श्री लक्ष्मण सिंह, श्री साधु सिंह, श्री विजयमल यादव, श्री चुन्नु मिश्र और वर्तमान प्रधानपति श्री रविंद्र यादव हुआ करते थे। आज के समय में अपने गांव में खेल और उसकी व्यवस्था को लेकर क्या स्थिति है, किसी से छिपा नहीं है।
किसी जमाने में इसी खेल के बल पर सेना, रेलवे और पुलिस में सैकड़ों लोग नौकरियां पाये थे।
देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद अभी तक कई पंचायती सरकारें बन चुकी हैं। अपने गांव के पहले प्रधान स्व. अमर सिंह बने थे। उसके बाद स्व. ह्रदय नारायण सिंह, स्व. मनोहर मिश्र, स्व. घनश्याम सिंह, स्व. गुरजू यादव (अल्पकार्यकाल), देवांती देवी (अल्पकार्यकाल), श्री तेजू सिंह, उर्मिला देवी (स्व. रामध्यान यादव), श्रीमती भगमनिया देवी (श्री अवधेश यादव) और वर्तमान में श्रीमती जानकी देवी (श्री रविंद्र यादव) प्रधान बनीं हैं।

सभी प्रधानों ने स्थिति और परिस्थिति के हिसाब से गांव के प्रतिनिधि के तौर पर विकास कार्य कराए और वर्तमान प्रधान भी अपने सामर्थ्य का परिचय दे रहे हैं। आजादी के बाद अपने गांव में जो विकास कार्य होना चाहिए था वैसा अभी तक हो नहीं पाया है। इस पर गांव के नवयुवकों को चेतना चाहिए। और, अपने गांव की पहचान दबी और छिपी है उसको उभारकर जिला, प्रदेश और देश के स्तर पर ले जाने का प्रयास करना चाहिए । जो हमारे पूर्वजों ने अपने समय में हर क्षेत्र में एक स्तर तक किया है। इसके लिए हमें अपने गांव के ही इतिहास में झांकना होगा जहां से हमको अपने गांव को आगे बढ़ाने की सोंच मिलेगी। हमें जाति, धर्म, रंग, गरीबी, अमीरी, शिक्षित, अशिक्षित का भेद मिटाकर सबको एक नजर से देखना होगा। हमारी सोंच में योग्य और जरुरत मंद को ज्यादा से ज्यादा अवसर और साधन मुहैया कराने की दृष्टि होनी चाहि
ए। तभी जाकर हम अपने लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर दे पाएंगे।
(अपने गांव के इतिहास को संजोने का एक प्रयास है। इसमें गांव के लोगों का कोई भी सुझाव सादर आमंत्रित है)
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नीतीश सिंह (काजू), पत्रकार। On Facebook -: nitish singh

संपर्क सूत्र-: 8860799918

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Saturday, 13 January 2018

युवराजपुर गाजीपुर के युवक गिरीश कांत ने सिनेमाटोग्रॉफी में हासिल किया मुकाम


युवराजपुर गाजीपुर के युवक गिरीश कांत Girish Kant  ने सिनेमाटोग्रॉफी में हासिल किया मुकाम

#गिरीश_कांत  #युवराजपुर #गाजीपुर( #Ghazipur #yuvrajpurआप नीचे दिए ज़ी सिने अवॉर्ड 2018 के लिंक पर #गिरीश_कांत को 9 से 16 मिनट के अंतराल मे देख सकते है
Zee Cine Awards 2018 - December 30, 2017 - Full Event

अगर, मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी काम कठिन नहीं होता है। कई ऐसे लोग होते हैं, जो इसी दृढ़इच्छा शक्ति की बदौलत अपना मुकाम हासिल कर लेते हैं। उन्हीं में से एक हैं उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक गांव युवराजपुर के युवक गिरीश कांत पिता का नाम विजय कांत । जिन्होंने सिनेमाटोग्रॉफी जैसे फील्ड को करियर के रूप में चुना, जिसको लेकर अमुमन ग्रामीणों में उतनी जागरूकता नहीं होती है।
वह भी ऐसे कल्चर में जब घर-गांव के लोगों की यह मानसिक प्रवृत्ति होती है कि उनके घर का लड़का जीवन चलाने के लिए सरकारी नौकरी हासिल करे। ऐसे में, अपनी सृजनात्मक क्षमता की बदौलत उन्होंने सिनेमाटोग्रॉफर के रूप में न केवल बॉलीवुड में एक अच्छी पहचान बना ली है, बल्कि अपने जिले और गांव का नाम भी रोशन किया है। बड़ी बात यह है कि उन्होंने रोहित श्ोट्टी की सफलतम फिल्म गोलमाल अगेन में बतौर एडीशनल सिनेमाटोग्रॉफर काम करके न केवल नाम कमाया, बल्कि शोहरत भी कमाई है। वह इसे अपने करियर का यू-टर्न मानते हैं, क्योंकि, उन्हें इस फिल्म से बहुत कुछ सीखने और समझने को मिला है। अपने लिए इस करियर को चुनने का जज्बा भी उन्हें एक संयोग के तहत जगा, जब एक स्थानीय शादी समारोह में उनके आंखों के आगे कैमरे का तेज फ्लैश चमका। वह कहते हैं कि आप चाहे तो इसे लव एट फस्र्ट साइट कह सकते हैं, लेकिन मेरे अंदर सिनेमाटोग्रॉफी के लिए जुनून तभी से पैदा हुआ।
गिरीश बताते हैं कि उसके बाद मैंने कई बार उस कैमरे को छूने की कोशिश की, लेकिन हर बार असफल रहा और डांट भी खाई। 2००5 में  राजकीय सिटी इंटर कॉलेज गाज़ीपुर 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद हमारे सभी साथी इस बात को लेकर काफी संशय में थे कि आगे करना क्या है। यह उनके करियर का संयोग ही रहा कि एक दिन दैनिक जागरण अखबार में प्रकाशित होने वाले जोश में उन्होंने गारमेंट फिल्म टेलीविजन इंस्टीट्यूट बैंग्लूर के बारे में पढ़ा। जिसमें सिनेमाटोग्रॉफी कोर्स के बारे में ही दिया गया था। वह बताते हैं कि फिर बिना कोई समय गवाएं उन्होंने बैंग्लोर जाने की ठान ली थी, परन्तु सच्चाई ये भी थी कि एक लोअर मिडल क्लाश परिवार से होने के कारण उस कोर्स की फीस मुझे सबसे अधिक आकर्षक लगी, जो मात्र 11 हजार प्रतिवर्ष थी, जिसे वह एफोर्ड कर सकते थ्ो, हालांकि कोर्स तीन साल का था, लेकिन बैंग्लोर में पांच साल गुजारने के बाद मैं मुबंई आ गया, क्योंकि तब मुझे बड़े फ्लैटफार्म की जरूरत थी। कुछ महीनों तक बतौर सहायक सिनेमाटोग्रॉफर काम करने के बाद मुझे पहले इंडिपेनडेंट काम के लिए फोन आया, फिर उसके बाद एक के बाद एक काम मिलने लगे, लेकिन मैं कहीं न कहीं अपने आप से खुश नहीं था, क्योंकि मुझे फिल्मों में काम करना था। आखिरकार, 2०15 में मुझे मेरी पहली फिल्म मिली द परफेक्ट गर्ल। एक छोटी बजट की फिल्म होने के बाद भी फिल्म ने अच्छा पैसा कमाया। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी मुझे कई फिल्मों के ऑफर आए, लेकिन जब तक स्क्रिप्ट अच्छी नहीं मिलती मैं काम के लिए मना कर देता था।
उन्होंने 2०16 अच्छा रहा, जब उन्हें रोहित श्ोट्टी की फिल्म गोलमाल अगेन में बतौर एडीशनल सिनेमाटोग्रॉफर काम करने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की वजह से मैंने काफी कुछ सीखा और देखा। फिल्म सफल हुई तो शोहरत भी कमाई। और अब मन में फिल्मों के लिए काम करने की इच्छा शक्ति रही है, लेकिन मजे की बात यह है कि उनके घरवाले उनसे अभी भी कहते हैं कि कोई सरकारी नौकरी देख लो, ये प्राइवेट है। सरकारी नौकरी की बात कुछ और होती है, लेकिन मेरा मानना है कि उन्होंनें इस जन्म को फिल्मों के लिए समर्पित किया है, अब जो होना है वो अगले जन्म में देख्ोंगे। वह बताते हैं कि मुझे फिल्मों से लगाव इसीलिए है कि ये एक धर्म है, जिसमें कोई किसी के धर्म को नहीं देखता और हम सिर्फ काम करते हैं। हम कुछ क्रिएट करने की कोशिश करते हैं, जिससे सब लोगों को आनंद आ सके।











संपादकीय
कुश तिवारी  Kush Tiwari
 युवराजपुर गाज़ीपुर
मोबाइल नो -: 9555484663


Sunday, 25 June 2017

हजाम और हज़ामत युवराजपुर ग़ाज़ीपुर

#हजाम और #हज़ामत शब्दों के अर्थ, हजाम का मतलब नाई और हज़ामत का अर्थ है बाल की कटिंग से है, हमारे यहाँ हज़ामत की शुरुवात भी #दैविक एवं #धर्मो के परम्परा अनुसार होती है, यह तस्वीर नब्वे के दशक की है जब हमारे मुंडन #संस्कार का प्रयोजन #हिन्दू #रीति #रिवाज़ के अनुसार हमारे पैतृक गांव #युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर में वर्षो पहले प्रयोजित किया गया था, शुरुवात पहले गंगा मैया के दर्शन के बाद गांव के देवी देवता के #पूजन के बाद हमारे यहाँ के प्रसिद्ध देवी स्थल #कमाख्या धाम के तरफ बाल के मुंडन प्रकिया के आखिरी चरण को अंजाम दिया जाता है, सर के बाल रूपी मुख का रूपांतरण टकले गंजे स्कल के रूप में हो जाती है
मेरे हरकतों का पता भी इस तस्वीर से भली भाति पता चलता है कि सामने बैठे #मुक्तेश्वरबाबा नाई को #चिड़ाने से लेकर और भी कई शरारती कार्यो को भी मैंने उस दौर में बख़ूबी अंजाम दिया था


गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया- लव तिवारी

गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया
चंद गलिया और अपनों में दिन पुराना बीत गया

पनघटों पर भरती गगरी और रात की लोरिया
ऐसी जिंदगी को देखते-2 एक जमाना बीत गया

मैं बड़ा क्यों हुआ और आया क्यों परदेश में
आज कुछ सोचूँ तो रोऊ मुस्कुराना बीत गया

खेत और खलिहान के वो पग डंडों से रास्ते
चिड़ियों की कतुहल के स्वर का आना बीत गया

गांव की गोरी की मुस्काती छवि और प्यार भी
कैसे उनको भूलू मैं उनका शर्माना बीत गया

चाँदनी रातो में छत पर मिलने को बेकरारी सी
थी नजाकत और शराफ़त फिर ख़ामोशी से आना बीत गया

प्रस्तुति- लव तिवारी
रचना- 02-02-17


प्रधान चुनाव विशेष दिसम्बर 2015

01 दिसम्बर 2015 चुनाव का दिन जहा ग्राम प्रधानो की दावेदारी मे सारे प्रत्याशी अपने भाग्य आजमा रहे थे , वही मे एक अलग आनंद की प्राप्ति कर रहा था अपने गाँव के बड़े बुजुर्ग और मित्रो से मिलने का , कुछ और भी रोचक घटनाए सामने से गुज़री जैसे हर एक मतदाता हर एक प्रत्याशी के सामने उसे ही वोट देने की हामी भर रहा था , तो इस बात से किसी एक प्रत्याशी के जीत का दावा तो नही किया जा सकता ,परन्तु कुछ प्रत्याशी की तरफ मतदाताओ का रुझान अधिक था,

हर एक सख्स मुझे लग रहा था अपना ही ..,
किस किस से कहु की उसे आप वोट मत देना

रही बात भावी प्रधान कि तो इस बात का भी पता 13 दिसम्बर को ही चलेगा, हमारी यही मंशा है ,की जो भी चुना जाएगा वो गाँव के हित और विकास की प्रगति को एक नयी राह दिखाएगा


धन्यबाद- लव तिवारी


बाढ़ के दौरान युवराजपुर गाज़ीपुर 22 अगस्त 2016

गाजीपुर। #गंगा में #बढ़ाव का सिलसिला जारी है। नए इलाकों में पानी पसर रहा है। यहां तक कि पानी डीएम के #सरकारी आवास तक में घुस गया है। शास्त्री नगर सहित शहर के अन्य तटवर्ती #बस्तियों में पानी पहुंच गया है। बाढ़ से घिरे जमानियां के देवरियां तथा सब्बलपुर के बांड़ की बस्तियां खाली कराई जा रही हैं। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक सोमवार की दोपहर एक बजे प्रति घंटा एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ाव हो रहा था। जल स्तर 64.80 मीटर पर पहुंच चुका था। वर्ष 2013 के निशान 65.22 मीटर से मात्र 42 सेंटीमीटर जबकि सन् 1978 के हाईलेवल 65.25 मीटर से महज 45 नीचे रह गया है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन दिनेश सिंह ने बताया कि ललितपुर के माताटीला बांध से पानी छोड़ने की मात्रा में कमी आई है लेकिन मध्य प्रदेश के टोंस नदी #रीवा परिक्षेत्र का पूरा पानी लेकर #इलाहाबाद #संगम की नीचे गंगा में पहुंच रही है। उधर चंबल का पानी इटावा के पास यमुना में गिर रहा है। यमुना प्रति घंटा तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही है और गंगा में उसका पानी पहुंच रहा है। गंगा इलाहाबाद में प्रति घंटा दो सेंटीमीटर तथा वाराणसी में एक सेंटीमीटर की #रफ्तार से बढ़ रही है। इं.सिंह ने बताया कि मौजूदा वक्त में गंगा में साढ़े 19 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। बिहार में सोन, कोसी, घाघरा तथा गंटक का पानी भी गंगा में मिल रहा है। इसकी वजह से गंगा के निचले हिस्से में पानी निकलने का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। स्थिति यही रही तो हैरानी नहीं कि 23 #अगस्त की सुबह वर्ष 2013 और शाम तक सन् 1978 के #जल स्तर को गंगा पार कर जाएं। उन्होंने बताया कि गंगा की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभाव गाजीपुर की जमानियां तहसील क्षेत्र में है। वहां के टौंगा, परमानंदपुर, बरईपुर, हसनपुर, नसीरपुर, नकदीलपुर, अठहठा, सब्बलपुर युवराजपुर पटकनिया भानमल राय, कल्यान चक, दुल्लहपुर, साधुपुर उर्फ रामपुर, कल्यानपुर आदि गांव बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। साथ ही तियरी, केसरुआ, गायघाट, धुस्का, भतौरा, कुतुबपुर, रेहुणा आदि गांव कर्मनाशा की बाढ़ की जद में हैं। एडीएम आनंद शुक्ल ने बताया कि कामाख्या तथा मतसा में एनडीआरएफ की टीम लगाई गई है। चार नावों के साथ टीम में 35 जवान हैं। टीम प्रभावित गांवों की सुरक्षा में लगी है। रेवतीपुर तथा देवरिया में पीएसी के जल सुरक्षा दस्ते को तैनात किया गया है। चार वोट के साथ दल में 35 जवान हैं। इसके अलावा 200 नाव तथा 25 इंजन चालित नावों को राहत कार्य में लगाया गया है। एडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों से आग्रह किया कि वह फिलहाल नहीं मानें कि गंगा घटने वाली हैं। बेहतर होगा कि सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं।

आज अपने ननिहाल युवराजपुर में नाना संग समाजसेवी प्रवीण तिवारी जी

आज अपने ननिहाल युवराजपुर में नाना संग ::--
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आज बहुत दिनों के बाद अपने ननिहाल गए । नानी के इस दुनिया से विदा होने के बाद आज पहली बार हमारा मन ननिहाल जाने का हुआ । हमारी नानी को गुजरे पाँच साल से अधिक हो गए । हमारे बचपन का अधिकांश समय ननिहाल में ही बीता है । इसलिए हमारे संस्कार पर हमारे ननिहाल का अधिक प्रभाव पड़ा । त्याग और परिश्रम भरा जीवन हम अपने नाना से ही सीखे । हमारे नाना रिटायर्ड फौजी (कैप्टन) इस वक्त 90 साल से ऊपर हैं तब भी वह अपने लिए किसी का सहयोग नहीं लेते । हम अपने नाना में एक आदर्श पिता को देखे और अपने पिता में भी इनको ही खोजते रहे । हमारे तीन मामा हैं । बड़े मामा श्री अविनाश दुबे में भी सेवा भाव कूटकूटकर भरा है । अपने पराये में कोई भेद नहीं । बड़े मामा जितना प्रेम और सेवा अपने माता पिता की करते थे उतना ही अपने बड़े पिता एवं बड़ी मां की भी करते इस वजह से हम कन्फ्यूजन में ही रहते कि इनके असली माता-पिता कौन हैं । सीमित संसाधनों में भी बड़े मामा वेलमेन्टेन ढंग से अधिकारियों की भाँति रहते हैं और किसी भी रिश्ते और संबंध को अपने बल पर निभाते हैं । मझले राकेश मामा भी कोई दुखी-पीड़ित दिखा नहीं कि अपने आप को समर्पित कर देते हैं । किसी की भलाई के लिए अपना जीवन भी संकट में डाल देते हैं । किसी के भी प्रति लगाव दिखाते नहीं परन्तु जरूरत पर सबसे पहले खड़े हो जाते हैं । छोटे मामा राहुल भी संघर्ष की मूर्ति । इनका जज बनना किसी के लिए भी प्रकाश स्तंभ है ।
युवराजपुर के बहुत से लोग जिनको हम मामा कहते हैं । उनमें और अपने सगे मामा में भेद करना मुश्किल है । रामअवतार तिवारी मामा, अजय तिवारी मामा, भानु सिंह मामा, मनोज सिंह मामा, शिब्बू मामा कभी लगा ही नहीं कि ये सारे लोग अलग अलग घर के हैं ।
गंगा के किनारे निवास करने के कारण वहाँ के लोगों में आध्यात्मिकता कूटकूट कर भरा है । भजन कीर्तन संध्या वहाँ खूब होता है । कला वहाँ के खून में है । चाहे वह रंगमंच हो जिसके मिसाल के रूप में हमारे मित्र योगेश विक्रांत और इनके बड़े भाई शांति भूषण को कौन नहीं जानता और संगीत के मामले में लवतिवारी-कुशतिवारी, श्री अजय तिवारी, शिब्बू मामा कौन नहीं जानता ।
महुआ चैनल के मालिक पी के तिवारी भी इसी गाँव के हैं ।श्री अरुण प्रजापति जी आज अपने बल पर पूना में एक बड़ी कंपनी के मालिक हैं ।
शहीद विश्वंभर सिंह की वीरता गाँव के लिए एक मिसाल है ।
कुल मिला कर हम आज जो कुछ भी करते दिख रहे हैं उन सब के पीछे युवराजपुर से बचपन में मिला संस्कार है ।

Saturday, 24 June 2017

युवराजपुर गाज़ीपुर अवैध कब्जा के सन्दर्भ मे मेरी कलाम से

Source from Yuvrajpur Ghazipur Facebook Group

हम कुछ लिख रहे है उससे पहले आप सभी से माफ़ी की भी गुंजाईश रखते है ,
गांव में आज कल एक जुटता का दौर चल रहा है और वो है , एक जूट होकर मंदिर का निर्माण पिछले कुछ समय तक गांव के लोगो ने एक जुटता दिखाकर काली माता की मंदिर का निर्माण एवं बहुत सराहनीय कार्य इस तरह की एक जुटता की हम प्रशंसा भी करते है , काली माता के मंदिर बनने के बाद अब पछिम टोला के शिव जी के मंदिर के पुनःनिर्माण की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा हैं यह भी अपने आप में सराहनीय कार्य है लेकिन गांव के लोगो को दैविक कार्यो को छोड़ सामाजिक कार्यो को कैसे अंजाम दे ये सबसे बड़ा मुद्दा है , गांव में पेड़ नहीं है न ही अस्पताल न खेल का मैदान, सामजिक कार्यो के प्रति लोगो को कैसे अवगत कराये अपने गांव का पानी भी अब दूषित हो गया , मुझे ठीक से नहीं याद है की पानी में फ्लोराइड की मात्रा बड़ी है आर्सेनिक की, आज पानी दूषित होगा कल वायु और आगे मृदा मिटटी , नॉएडा स्थित में आवास पर एक बार बहस छिड़ी मैंने कहा की गांव में बहुत से लोग सहयोग देने को अग्रसर है और अच्छे कामों के लिए कोई पीछे नहीं हटेगा, एक बड़े भैया तुरन्त बोले की 1 लाख की सहयोग राशि मिलाती तो वॉली बाल क्रिकेट का टूनामेंट करा देते,
बहुत कुछ करना है गांव के पूर्वी एवं पश्चिम तरफ के गड़हीयो पर धीरे धीरे लोग कब्जा कर रहे है और पहले की अपेक्षा गड़हियो के आकर में कमी आ रही है इस बात से मैं प्रधान प्रतिनिधि श्री चुनमुन भैया को अवगत करना चाहता हु की गांव में जब गड़ही ही नहीं रहेगी तो गांव का गन्दा पानी कहा जायेगा , यह भी एक गंभीर मुद्दा है इस तरह के मुद्दे को ध्यान दिया जाय वरना आगे की स्थिति और भयानक होगी , अपने गांव का युवा वर्ग अपनी छुट्टी का उपयोग अपनी दीवाली मानाने में यानि ( जुआँ ) खेलने में करता है , और सभी को विकास चाहिए, एक मुद्ददा सबके पास है की सारे काम प्रधान जी ही करेगे , कुछ हम और आप भी कर ले , जिसकी जीतनी छमता हो ,मेरी बातो से किसी को ठेस पहुची हो तो मैं माफ़ी भी मागता हु
प्रस्तुति- #लव_तिवारी
ग्राम सभा- #युवराजपुर जिला- #ग़ाज़ीपुर

14 साल तक Wife से दूर रहा ये राइटर, आमिर को सिखा चुका है भोजपुरी

Source from Dainik Bhaskar
 
इलाहाबाद.अपकमिंग फिल्म 'मिर्जा जूलियट' के राइटर-प्रोड्यूसर शांति भूषण प्रोमोशन के लिए इलाहाबाद पहुंचे। 7 अप्रैल को रिलीज होने वाली फिल्म में प्रेमियों की लाइफ में आने वाले उतार-चढाव देखने हो मिलंगे। यहां इन्होंने लाइफ से जुड़े कई किस्से बताए। उन्होंने बताया, '' बॉलीवुड एक्टर आमिर खान को PK फिल्म के लिए भोजपुरी इन्होंने ही सिखाई। अब तक ये कई फेमस सीरियल की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं।'' dainikbhaskar.com 'मिर्जा जूलियट' फिल्म के राइटर की लाइफ से जुड़े कुछ ऐसे ही इंटरेस्ट‍िंग FACTS बता रहा है।

Q. फिल्म 'मिर्जा जूलियट' में दर्शकों को क्या दिखाना चाहते हैं आप ?
A.ये फिल्म खासकर यूपी और बिहार पर आधारित है। कहते है कि प्यार में कई इमोशन होते हैं, कुछ इन्ही पलों को ये फिल्म समेटे हुए हैं।इसमें प्रेमियों की लाइफ में आने वाले उतार-चढाव को दिखाया गया है।
Q.इस फिल्म का डायरेक्टर और स्टार कास्ट कौन हैं?
A. फिल्म का लेखक, प्रोड्यूसर तो खुद मैं ही हूं। इस फिल्म के डायरेक्टर राजेश राम सिंह, हीरो दर्शन और हिरोइन पिया बाजपाई हैं। दर्शन की ये चौथी फिल्म है। इससे पहले वह 'मेरीकाम-सरबजीत' जैसी फिल्मों में बेहतरीन ऐक्टिंग कर चुके हैं। इस 'मिर्जा जूलियट' फिल्म के आधे से ज्यादा सीन पूर्वी यूपी के अहरौरा, मिर्जापुर और बनारस में शूट हुए हैं। कुछ सीनों को हिमांचल प्रदेश के एक धर्मशाला में फिल्माया गया है।
Q.आपका शुरुआती सफर कैसा रहा?
A. इंटर के बाद जब मेडिकल की पढ़ाई करने जब इलाहाबाद से लखनऊ गया तो वहां पहली बार अपनी मूछ मुड़वाई। उसके बाद ऐसी जलालत हुई कि दोबारा इसे करवाने की हिम्मत नहीं हुई। लेकिन थियेटर से जुड़ने के बाद फिर से मूछ मुड़ाना और बड़े बाल रखने का फैशन शुरू हुआ। इलाहाबाद में 12 साल तक संघर्श करने के बाद 2000 में मै मायानगरी मुंबई पहुंच सका।
Q. मुंबई पहुचंने के बाद आपका स्ट्रिगल कैसा रहा?
A. जब मुंबई पहुंचा तो कई रातें स्टेशन पर ही सोना पड़ा। काम की तलाश में भटकता था। इस दौरान जब पहला ब्रेक स्टार प्लस के शो 'कहानी घर-घर की' में मिला। रोल भले ही छोटा सा रहा, लेकिन दो जून की रोटी का जुगाड़ हो गया। उसके बाद सीआईडी, क्राइम पेट्रोल, आहट जैसे कई सीरियलों में काम मिला।
Q. आमिर खान को आपने भोजपुरी हिंदी सिखाई है?
A. जी हां.. मैंने ही सिखाई है, पूरे 2 साल तक उनके और राजकुमार हीरानी के साथ रहा। 2012 में अचानक एक दिन उनके पीए का फोन आया और बोला कि उनसे राजकुमार हीरानी जी मिलना चाहते है। मैं तो चौंक पड़ा। अगले दिन मैं उनके ऑफिस गया तो उन्होंने आमिर खान को भोजपुरी सिखाने की बात कही, और मैं तुरंत तैयार हो गया।

स्वर्गीय मदन मोहन सिंह पूर्व ग्राम प्रधान युवराजपुर ग़ाज़ीपुर

स्वर्गीय मदन मोहन सिंह पूर्व ग्राम प्रधान युवराजपुर ग़ाज़ीपुर 1995- 2000 इनके बाद कमशः प्रधानो कार्यो की विवेचना
1995-2000 मदन मोहन सिंह
2000- 2005 रविन्द्र सिंह
2005- 2010 रविन्द्र सिंह
2010- 2015 अलका सिंह पत्नी मन्टू सिंह
2015- अब तक प्रधानप्रतिनिधि चुनमुन सिंह

1995 से पहले के कार्यकाल के बारे में बहुत कुछ नहीं थोड़ी बहुत जानकारी है , 1995 से पहले आदरणीय गुरु जी श्री ऋषिकांत सिंह जी , जो विकास की रफ़्तार 1995 से 2000 के बिच देखने को मिली उसका मिलाता जुलता रूप भी आगे की राजनीतिज्ञों के द्वारा नहीं मिली ,बस सरकार के द्वारा पैसे की कमी 1995 से 2000 के बीच हम 4 से 8 क्लास के विद्यार्थी रहे और गांव के साथ इस वयक्ति विशेष की कृपा हमारे विद्यार्थी जीवन पर भी पड़ी, उस समय के द्वारान बहुत से कार्य को जैसे सारे गाँवो के सड़को को ईट का रूप खडंजा और पतंजा का निर्माण , गांव के सारे कुओं की मरम्मत , इंद्रा आवास के तहत गांव के हरिजन और निम्न बस्ती में घरो के निर्माण और बहुत से कुछ बाद में विकास की रफ़्तार धीरे हो गयी , पूछे जाने पर सरकार के द्वारा पैसे की कमी का हवाला दिया जाने लगा ,इन सब लिखने के पीछे हमें इस बात की पुष्टि करनी थी कि कौन से प्रधान का कार्यकाल सबसे सरहनीय था, इसे अन्यथा न ले , ये पोस्ट किसी राजनीती दल या राजनितिक मनसे से नहीं लिखी गयी है
धन्यबाद
लव तिवारी
#युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर
#उत्तर_प्रदेश
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